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भारत के 7 सबसे चमत्कारी एवं रहस्यमयी मंदिर

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भारत में लाखों की संख्या में मंदिर मौजूद हैं. प्रत्येक मंदिर की अपनी अलग-अलग पौराणिक कथाएं तथा मान्यताएं हैं एवं बहुत से मंदिर अपने चमत्कार के वजह से प्रसिद्ध हैं. बता दें, इन चमत्कारों का रहस्य आज तक विज्ञान भी पता नहीं लगा सका है. आइये जानते हैं भारत के 9 रहस्यमय मंदिर एवं उनके चमत्कारों के सम्बन्ध में-

तिरुपति बालाजी

ये मंदिर आंध्रप्रदेश के तिरुमाला में स्थित हैं. तिरूपति बालाजी को भगवान वैंकटेश एवं गोविंदा के नाम से भी जाना जाता है. ऐसा कहा जाता हैं कि इस मंदिर की उत्पत्ति वैष्णव संप्रदाय ने की हैं.

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लोगों की मान्यता है कि भगवान तिरूपति की मूर्ति पर जो बाल हैं वो वास्तविक है एवं बेहद ही मुलायम है. यदि आप मूर्ति पर कान लगाकर सुनते हैं तो आपको समुद्र की लहरें सुनाई पड़ती हैं, जिस कारण मूर्ति पर सदैव नमी बनी रहती है.

काल भैरव

ये मंदिर मध्यप्रदेश के उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित हैं. मंदिर में अनेक प्रकार के प्रसाद चढ़ाए जाते हैं किन्तु इस मंदिर में प्रसाद के तौर पर शराब चढाई जाती है.

इस मंदिर की विशेषता ये है कि जैसे मूर्ति के मुख पर शराब का प्याला लगाया जाता हैं तो वो प्याला स्वतः ही खाली हो जाता है. विज्ञान भी इस रहस्य का पता आज तक नहीं लगा सका है. भगवान कालभैरव को उज्जैन का सेनापति भी कहा जाता है.

जगन्नाथ मंदिर

ये मंदिर उड़ीसा राज्य के पुरी शहर में स्थित है. यहाँ भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है. ये मंदिर हिन्दुओं के चार धाम में से एक धाम है. इस मंदिर के शिखर पर लगा झंडा सदैव हवा के विपरीत दिशा में नज़र आता है. मंदिर के शिखर पर एक सुदर्शन चक्र भी हैं, जिसे किसी भी स्थान से देखने पर वो सदैव हमारे सामने ही दिखाई पड़ता हैं.

जगन्नाथ मंदिर के प्रसाद बनाने हेतु 7 बर्तन एक दूसरे के ऊपर रखे जाते हैं. प्रसाद को लकड़ी जलाकर ही पकाया जाता है. किन्तु इस प्रक्रिया में सबसे ऊपर वाला बर्तन का प्रसाद सर्वप्रथम पकता है. बता दें, मंदिर के गुंबज की छाया भी जमीन पर नज़र नहीं आती. मंदिर के शिखर के आस-पास कोई पक्षी भी उड़ता हुआ नज़र नहीं आता है. ये सभी चमत्कार आज भी लोगों के लिए रहस्य बने हुए हैं.

मैहर माता का मंदिर

ये मंदिर मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में स्थित है. जब पुजारी संध्या के वक़्त आरती के पश्चात मंदिर के कपाट बंद कर नीचे आ जाते हैं तब भी मंदिर के भीतर से घंटी एवं पूजा की आवाजें आती हैं.

ऐसी मान्यता है की माता के भक्त आल्हा अभी भी यहाँ पूजा करने आते हैं. अनेक दफा लोगों द्वारा इस रहस्य को जानने का प्रयास किया गया, किन्तु केवल असफलता ही हाथ आई है.

ज्वाला देवी मंदिर

ये मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित है. इस मंदिर में अनंत काल से ज्वाला प्रज्वलित है. ये भारत में स्थित 51 शक्तिपीठों में से एक है. बता दें, यहाँ माता सती की जीभ गिरी थी.

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मंदिर प्रांगण में ‘गोरख डिब्बी’ नामक जगह है, जो कि एक जल कुंड है. इस कुंड में गर्म खौलता हुआ पानी मौजूद है, जबकि कुंड का पानी छूने पर ठंडा लगता है.

भोजेश्वर शिव का मंदिर

मध्यप्रदेश के भोपाल शहर से लगभग 30 किमी दूर ये मंदिर अपने अधूरेपन के रहस्य को समेटा हुआ है. इस मंदिर में स्थित शिवलिंग की ऊंचाई लगभग 7.5 फीट एवं परिधि 17.8 फीट है.

ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण राजा भोज के द्वारा करवाया गया था. इसकी अधूरी रहने के पीछे की कहानी है कि इस मंदिर का निर्माण केवल एक ही दिन में होना था किन्तु सुबह होते ही इस मंदिर के निर्माण कार्य को रोक दिया गया एवं ये मंदिर सदैव के लिए अधूरा ही रह गया. आज भी इस मंदिर के हिस्से मंदिर के आस-पास ही बिखरे पड़े हुए हैं.

कामाख्या मंदिर

ये मंदिर पूर्वोत्तर भारत गुवाहाटी में स्थित है. ये मंदिर भी 52 शक्तिपीठों में से एक है. ये सबसे महत्वपूर्ण शक्तिपीठों में से एक है. ऐसी मान्यता है कि जब माता सती के द्वारा देह त्याग किया गया था, उस दौरान शिव जी उनके पार्थिव शरीर को लेकर आकाश मार्ग में भटक रहे थे. तभी देवी सती का गुप्तांग यहाँ पर गिरा था. कहा जाता है कि यहां हर किसी की कामना सिद्ध होती है अतः इस मंदिर को कामाख्या मंदिर कहा जाता है.

इस मंदिर को 3 भागों में विभक्त किया गया है. जिसके एक भाग में माता के दर्शन होते हैं वहां हर वक़्त पत्थरों से पानी निकलता रहता है ऐसा कहा जाता है कि माह में एक दफा उन पत्थरों से खून निकलता है. खून निकलने की वजह क्या है, ये आज तक कोई भी पता नहीं कर पाया है.

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